Forest Fire.

|| सुभह वाली छाई,
आज कल मैं रात मे बनाती हूँ

तुम्हारे बिन वो कटाये हुए दिन,
अफ़सोस करने लगी हूँ

जलती हुई जंगल मे बस गयी हूँ,
यह हवाओं मे तुम्हारी महेक,
गूँज रही हूँ ||

Advertisements